मुझे न सताओ इतना कि मैं ख़फ़ा हो जाऊँ तुमसे
मुझे अच्छा नहीं लगता अपनी साँसों से जुदा होना

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझसे
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझसे

वो खामखाँ ही मुझसे खफा खफा है
छोड़ो मेरा इश्क़ तो एक तरफा है

जो ख़फ़ा होगा वही बेपनाह इश्क़ करेगा मुझसे
और जो बेपनाह इश्क़ करेगा ओ ख़फ़ा नहीं होगा

कभी खफ़ा मत होना हमसे
पता नहीं जिंदगी कब तक साथ निभाएगी
अगर आप भी हमसे रूठ जाओगे तो
मौत जिंदगी से पहले आ जाएगी

कुछ इस तरह ख़ूबसूरत रिश्ते टूट जाया करते हैं
दिल भर जाता है तो लोग ख़फ़ा हो जाया करते हैं

चुप रहते हैं के कोई ख़फ़ा न हो जाए
हमसे कोई रूसवा न हो जाए
बड़ी मुश्किल से कोई अपना बना है
डरते है की मिलने से पहले ही कोई जुदा न हो जाए

ख़फ़ा जब भी रहो तब वजह बता दिया करो
अपनी एक ख़ता ढूँढ़ने में हम कई ख़ता कर बैठे

वो आए थे मेरा दुखदर्द बाँटने के लिए
मुझे खुश देखा तो ख़फ़ा होकर चल दिए

हुस्न यों इश्क़ से नाराज़ है अब
फूल खुशबू से ख़फ़ा हो जैसे

Naaraj shayari in hindi

तुम ख़फ़ा हो गए तो कोई खुशी न रहेगी
तुम्हारे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी
क्या कहें क्या गुज़रेगी दिल पर
जिंदा तो रहेंगी पर जिंदगी न रहेगी

यही हालात इब्तिदा से रहे
लोग हमसे ख़फ़ा ख़फ़ा से रहे

जिस की हवस के वास्ते दुनिया हुई अज़ीज़
वापस हुए तो उसकी मोहब्बत ख़फ़ा मिली

कहा किसने यह जानम कि मैं तुमसे ख़फ़ा हूँ
पहला इश्क़ हूँ जानम और मैं पहली दफ़ा हूँ

ख़फ़ा न होना हमसे
अगर तेरा नाम जुबां पर आ जाए

सबकुछ है मेरे पास पर दिल की दवा नहीं
दूर वो मुझसे हैं पर मैं ख़फ़ा नहीं
मालूम है अब भी वो प्यार करते हैं मुझसे
वो थोड़ा सा जिद्दी है मगर बेवफ़ा नहीं

चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफ़ा निकली
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली
उनसे क्या कहे वो तो सच्चे थे
शायद हमारी तकदीर ही हमसे ख़फ़ा निकली

आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हो गए
महसूस हुआ तब जब वो जुदा हो गए
करके वफ़ा कुछ दे न सके वो हमें
पर बहुत कुछ दे गए जब बेवफ़ा हो गए

बिछड़ के तुमसे जिंदगी सज़ा लगती है
ये साँस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी जिंदगी भी बेवफ़ा लगती है

आग दिल में लगी जब वो ख़फ़ा हुए
महसूस हुआ तब जब वो जुदा हुए
कर के वफ़ा कुछ दे न सके वो
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए

2 line shayari

बहाना कोई न बनाओ तुम मुझसे ख़फ़ा होने का
तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा

किस किसको बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम हैं ख़फ़ा उनसे
कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है

इक तेरी बेरुखी से ज़माना ख़फ़ा हुआ
ऐ संगदिल तुझे भी ख़बर है कि क्या हुआ

ख़फ़ा नहीं हूँ तुझसे ए जिंदगी
बस जरा दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियों से

कमाल का शख़्स था जिसने जिंदगी तबाह कर दी
राज़ की बात है दिल उससे ख़फ़ा अब भी नहीं

इश्क़ में तहज़ीब के हैं और ही कुछ फ़लसफ़े
तुझसे होकर हम ख़फ़ा खुद से ख़फ़ा रहने लगे

वो ढूँढ़ रहे थे मुझको भूल जाने के तरीके
ख़फ़ा होकर उनकी मुश्किल आसान कर दी हमने

gussa shayari

ढूँढ़ रही है वो मुझसे ख़फ़ा होने का तरीका
सोचता हूँ थप्पड़ मारकर उसकी मुश्किल आसान कर दूँ

हम जिंदगी में आपसे ख़फ़ा हो नहीं सकते
मोहब्बत के रिश्ते बेवफ़ा हो नहीं सकते
आप भले ही याद किए बिना सो जाओ
हम याद किए बिना सो नहीं सकते

इस अजनबी दुनिया में अकेला ख़्वाब हूँ मैं
सवालों से ख़फ़ा छोटा सा जवाब हूँ मैं
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं

आज जी करता है बे बात ख़फ़ा हो जाऊँ
तू मनाती रहे दे देकर दलीलें शब भर

ख़फ़ा होने से पहले कोई वजह तो बताते जाते
वजह नहीं तो न सही झूठा कोई इल्ज़ाम ही लगाते जाते

अजीब शख़्स है भेद ही न खुलते उसके
जब भी देखूँ तो दुनिया से ख़फ़ा ही देखूँ

रूठ जाना तो मोहब्बत की अलामत है मगर
क्या खबर थी मुझसे वो इतना ख़फ़ा हो जाएगा

लब तो ख़ामोश रहेंगे ये बादा है मेरा तुमसे
गर कह बैठें कुछ निगाहें तो ख़फ़ा मत होना

दौड़ती भागती जिंदगी में बस यही तोहफा है
ख़ूब लुटाते रहे अपनापन फिर भी लोग ख़फ़ा है

मेरी बेताबियों से घबराकर
कोई मुझसे ख़फ़ा न हो जाए

अब तो हर शहर में उसके ही क़सीदे पढ़िए
वो जो पहले ही ख़फ़ा है वो ख़फ़ा और सही

है ग़लती भी तेरी
और खफ़ा भी है तू

थोड़ी थोड़ी ही सही मगर बातें तो किया करो
चुपचाप रहती हो तो ख़फ़ा ख़फ़ा सी लगती हो

एक ही फ़न तो हमने सीखा है
जिससे मिलिए उसे खफ़ा कीजे

जिसकी हवस के वास्ते दुनिया हुई अज़ीज़
वापस हुए तो उसकी मोहब्बत ख़फ़ा मिली

मोहब्बत ने इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है कि
आगे बढ़े तो सब ख़फ़ा और पीछे हटे तो बेवफ़ा

कोई अच्छा सा बहाना
बनाना तुम मुझसे खफ़ा होने का
क्योंकि तुझे चाहने के सिवा
मैंने अब तक कोई गुनाह नहीं किया है

परवाह नहीं अगर ये ज़माना ख़फ़ा रहे
बस इतनी सी दुआ है दोस्त मेहरबा रहे

हालेदिल सुनाने की मुद्दतों से ख़्वाहिश है
मगर सुना है मुझसे ख़फ़ाख़फ़ा मेरे हुजूर रहते हैं

कभी बोलना वो ख़फ़ा ख़फ़ा कभी बैठना वो जुदा-जुदा
वो ज़माना नाज़ ओ नियाज़ का तुम्हें याद हो कि न याद हो

वो तुझे भूल ही गया होगा
इतनी देर कोई ख़फ़ा नहीं रहता

तुझसे नराज़ नहीं ज़िंदगी बस खुद से ख़फ़ा हैं
जी रहे हैं बिन तमन्ना शायद ये ही दर्द ए दिल की दवा हैं

ख़फ़ा नहीं हूँ तुझसे ए ज़िंदगी
काश कोई मिले ऐसा जो मुझसे खफ़ा न हो
समझे मेरे मिज़ाज़ को और कभी जुदा न हो

लब तो ख़ामोश रहेंगे ये वादा है मेरा तुझसे
अगर कह बैठी कुछ निगाहें तो ख़फ़ा मत होना

लबों पे उसके कभी बहुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफ़ा निकली
कुछ पल ठहरी फिर चल निकली
उनसे क्या कहे वो तो सच्चे थे
शायद हमारी तक़दीर ही हमसे ख़फ़ा निकली

मेरे दोस्त की पहचान यही काफी है
वो हर शख़्स को दानिस्ता ख़फ़ा करता है

ख़फ़ा हैं फिर भी आकर छेड़ जाते हैं तसव्वुर में
हमारे हाल पर कुछ मेहरबां अब भी होते है

वो दिल न रहा जा नाज़ उठाऊँ
मैं भी हूँ ख़फ़ा जो वो ख़फ़ा है

क्या कहूँ क्या है मेरे दिल की खुशी
तुम चले जाओगे ख़फ़ा होकर

तुम हसते हो मुझे हँसाने के लिए
तुम रोते हो मुझे रुलाने के लिए
तुम एक बार ख़फ़ा होकर तो देखो
मर जाएँगे तुम्हें मानाने के लिए

ये जो सीने में धड़कता है बेवफ़ा सा है
मुझमे रहकर भी ये दिल मुझी से ख़फ़ा सा है

आख़िर देता मुझे ये कैसी सज़ा भी तू
बस जरा दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियों से

किस किसको बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

जो भी मिला वो हमसे खफ़ा मिला
देखो हमें मोहब्बत का क्या सिला मिला
उम्र भर रही फ़क़त वफ़ा की तलाश हमें
पर हर शख़्स मुझको ही क्यों बेवफ़ा मिला

यों लगे दोस्त तेरा मुझसे खफ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से खुशबू का जुदा हो जाना

उससे ख़फ़ा होकर भी देखेंगे एक दिन
कि उसके मनाने का अंदाज़ कैसा है

तुम ख़फ़ा हो गए तो कोई खुशी न रहेगी
तेरे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी

इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले
वो क्या करें जो तुमसे ख़फ़ा हो नहीं सकते

तोड़कर अहंदेकरम न आशना हो जाइए
बंदापरवर जाइए अच्छा ख़फ़ा हो जाइए

आग दिल में लगी जब वो ख़फ़ा हुए
महसूस हुआ तब जब वो जुदा हुए
कर के वफ़ा कुछ दे न सके वो
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए

रूठने का हक हैं तुझे पर वजह बताया कर
ख़फ़ा होना गलत नहीं तू ख़ता बताया कर

परवाह नहीं अगर ये ज़माना ख़फ़ा रहे
बस इतनी सी दुआ है की आप मेहरबां रहे

हर एक शख़्स ख़फ़ा मुझसे अंजुमन में था
क्योंकि मेरे लब पे वही था जो मेरे मन में था

हक़ हूँ में तेरा हक़ जताया कर
यों खफ़ा होकर न सताया कर

हर बार इल्ज़ाम हम पर लगाना ठीक नहीं
वफ़ा खुद से नहीं होती ख़फ़ा हम पर होते हो

तुम ख़फ़ा हो गए तो कोई खुशी न रहेंगी
सच कहु तुम्हारे बिना चिरागों में रोशनी न रहेगी

हर बार इल्ज़ाम हम पर ही लगाना ठीक नहीं
वफ़ा खुद से नहीं होती और ख़फ़ा हम पर होते हो

वो आए थे मेरा दुखदर्द बाँटने के लिए
मुझे खुश देखा तो ख़फ़ा होकर चल दिए

लगता है आज जिंदगी कुछ ख़फ़ा है
चलिए छोड़िए कौन सी पहली दफ़ा है

काश कोई मिले इस तरह के फिर जुदा न हो
वो समझे मेरे मिज़ाज़ को और कभी ख़फ़ा न हो

ख़फ़ा तुमसे हो कर ख़फ़ा तुमको कर के
मज़ाक़-ए-हुनर कुछ फुजूँ चाहता हूँ

ख़फ़ा होने से पहले ख़ता बता देना
रुलाने से पहले हँसना सिखा देना
अगर जाना हो कभी हमसे दूर आपको
तो पहले बिना साँस लिये जीना सिखा देना

ख़फ़ा थी शाख से शायद के जब हवा गुज़री
ज़मीन पे गिरते हुए फूल बेशुमार दिखे

करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते हैं
पहले ख़फ़ा होते हैं फिर मनाना भूल जाते हैं भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते हैं

इस दिल में आग सी लग गई जब वो ख़फ़ा हुए
फर्क तो तब पड़ा जब वो जुदा हुए
हमें वो वफ़ा करके तो कुछ दे न सके
लेकिन दे गए वो बहुत कुछ जब वो वेबफा हुए

सुना वो आजकल मुझसे खफा है
तो क्या कह दूँ उसे मैं वो बेवफ़ा है

हमारे दिल न देने पर ख़फ़ा हो
लुटाते हो तुम्हीं ख़ैरात कितनी

छेड़ मत हर दम न आईना दिखा
अपनी सूरत से ख़फ़ा बैठे हैं हम

या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम हैं ख़फ़ा उनसे
कल उनका ज़माना था आज अपना ज़माना है

इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले
वो क्या करें जो तुमसे ख़फ़ा हो नहीं सकते