तन्हाई का उसने मंज़र नहीं देखा

अफ़सोस की मेरे दिल के अंदर नहीं देखा

दिल टूटने का दर्द वो क्या जाने

वो लम्हा उसने कभी जीकर नहीं देखा

जो रूह की तन्हाई होती है न

उसको कोई ख़त्म नहीं कर सकता

लोगों ने छीन ली है मेरी तन्हाई तक

इश्क़ आ पहुँचा है इलज़ाम से रुसवाई तक

न्हाई शायरी

अपनी तन्हाई में खलल यों डालूँ

सारी रात खुद ही दर पे दस्तक दूँ

और खुद ही पूछू कौन

काँटों सी दिल में चुभती है तन्हाई

अंगारों सी सुलगती है तन्हाई

कोई आकर हमको जरा हँसा दे

मैं रोता हूँ तो रोने लगती है तन्हाई

मेरी तन्हाई को मेरा शौक न समझना

बहुत प्यार से दिया है ये तोहफा किसी ने

इश्क़ के नशे डूबे तो ये जाना हमने

फ़राज़ कि दर्द में तन्हाई नहीं होती तन्हाई में दर्द होता है

इस तन्हाई का हम पे बड़ा एहसान है साहब

न देती ये साथ अपना तो जाने हम किधर जाते

मैं हूँ दिल है तन्हाई है।
तुम भी होते अच्छा होता
मुझे तन्हाई की आदत है

मेरी बात छोड़ो तुम बताओ कैसी हो

कहीं पर शाम ढलती है कहीं पर रात होती है.

अकेले गुमसुम रहते हैं न किसी से बात होती है

तुमसे मिलने की आरज़ू दिल बहलने नहीं देती

तन्हाई में आँखों से रुक-रुक के बरसात होती हैं

alone shayari in hindi

तन्हाई की आग में कहीं जल ही न जाऊँ
के अब तो कोई मेरे आशियाने को बचा ले

शाम-ए-तन्हाई में इजाफा बेचैनी

एक तेरा ख़याल न जाना एक दूसरा तेरा जवाब न आना

तुझ पे खुल जाती मेरे रूह की तन्हाई भी
मेरी आँखों में कभी झाँक के देखा होता

इस तरह हम सुकून को महफूज़ कर लेते हैं
जब भी तन्हा होते हैं तुम्हें महसूस कर लेते हैं

यादों में आपके तनहा बैठे हैं
आपके बिना लबों की हँसी गँवा बैठे हैं
आपकी दुनिया में अँधेरा न हो इसलिए
ख़ुद का दिल जला बैठे हैं

मैं तन्हाई को तन्हाई में तनहा कैसे छोड़ दूँ
इस तन्हाई ने तन्हाई में तनहा मेरा साथ दिया है

अब तो याद भी उसकी आती नहीं
कितनी तनहा हो गई तन्हाइयाँ

किसी को प्यार की सच्चाई मार डालेगी
किसी को दर्द की गहराई मार डालेगी
मोहब्बत में बिछड़ के कोई जी नहीं सकता
और बच गया तो उसे तन्हाई मार डालेगी

तेरे बिना ये कैसे गुज़रेंगी मेरी रातें
तन्हाई का ग़म कैसे सहेंगी ये रातें
बहुत लंबी हैं ये घड़ियाँ इंतज़ार की
करवट बदल-बदल के कटेंगी ये रातें

जिंदगी यों हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में
तिरी याद आँखें दुखाने लगी

तन्हाई से तंग आकर हम
मोहब्बत की तलाश में निकले थे
लेकिन मोहब्बत ऐसी मिली
कि तनहा कर गई

तन्हाई न पाए कोई साथ के बाद
जुदाई न पाए कोई मुलाकात के बाद
न पड़े किसी को किसी की आदत इतनी
कि हर सॉस भी आए उसकी याद के बाद

हमारे चले जाने के बाद
ये समुंदर भी पूछेगा तुमसे
कहा चला गया वो शख़्स
जो तन्हाई में आकर
बस तुम्हारा ही नाम लिखा करता था

तन्हाई में मुसकराना भी इश्क़ है
और इस बात को सबसे छुपाना भी इश्क़ है